चुनावों का चौथा चरण और यह चुनाव प्रचार प्रसार पूरे जोरों पर .... देखना है किसकी उम्मीदवारी भारी पड़ती है .... और ये कैच !! जी हाँ मैंने लपका - आडवानी जी का । यूँ तो किसी के पीछे पड़ना मेरी फितरत नहीं, फ़िर भी लोग मजबूर करें तो मैं क्या करूँ ?
अब अचानक एटम-बम की बात कहाँ से आ गई ? वो तो हमारे पास पहले से ही हैं ? आप क्या उसमे फ्यूज़ लगायेंगे ? जनता को डरा रहे हैं या तालिबान को ? लगता है आप असिया गए हैं ! सुना है की आदमी जब साठ का हो जाता है तो सठिया जाता है और उसका बचपन लौटने लगता है । पर जब असियाता है तो पूरा बच्चा ही बन जाता है ! जैसे बच्चे खिलौना देख कर रोने लगते हैं ," मम्मी-मम्मी मुझे तो बस वोई वाला खिलौना चाहिए !!"
चुनावी माहौल में अचानक एटम-बम की बात थोडी भड़काऊ जरुर लगती है। जैसे नरेन्द्र मोदी जी अम्बाला में सरदारों से पूछ रहे थे कि डॉक्टर मनमोहन सिंह ने सरदारों के लिए क्या किया? कम से कम उन्होंने वह नहीं किया जो आपकी भारतीय जनता पार्टी ने हिन्दुओं के लिए किया! खैर! जब बम पहले से ही है तो आप क्या बनायेंगे? या जनता को बना रहे हैं ! वो (जनता) तो पहले से ही बनी बनाई है, उसको क्या बनाना?!!
आजकल आप रोज नए स्टेटमेंट दे रहे हैं , या आपकी पार्टी कि मीडिया केम्पेन सम्भालने वाली कंपनी आपसे दिलवा रही है ? उस दिन अचानक तालिबान से घबरा गए और कहने लगे, "तालिबान इस्लामाबाद पहुँच गया है, और सरकार कुछ नही कर रही" अगर वह इस्लामाबाद पहुँच गया है तो इसमें भारत क्या करे ?! और अगर कुछ करे भी तो जाहिर क्यों करे ? आप क्या बम फोड़ देते ?
उस दिन कहने लगे कि उनका बहुत बड़ा सौभाग्य है कि जनता से रूबरू होने का मौका मिला, पर बाकी कोई नेता ऐसा नहीं कह रहे। काफी भावुक हो कर आपका यह कहना कि पंडित जवाहरलाल नेहरू से ले कर डॉक्टर मनमोहन सिंह तक सभी को करीब से देखा है .... क्या दर्शाता है ? यही न कि आप पिचले पचास सालों से वेटिंग में हैं !! अरे मुद्दे की बात बताइए ... पहेलियाँ क्यों बुझा रहे हैं ? आप तो एडवांस में ही धन्यवाद देने कि मुद्रा में आ गए !!
आपका यह कहना कि सरकार के पास गिनवाने के लिए उपलब्धियों के नाम पर कुछ नही है, तो आपके पास क्या है ?!! बाबरी मस्जिद की ईंट ? या गोधरा के दुर्योधन? कंधहार में छोडे आतंकी? या मिशनरियों में की तोड़-फोड़ ? वैलेंटाइन डे पर मचाया गुंडा राज? या गुजरात में हो रहे 'फ्री एनकाउंटर स्टाइल मर्डर' ? भोपाल में पिछले चार साल से रोज हो रही 'चेन लूट' की घटनाएं ? या मुख्य मंत्री के भाई के घर हो रही चोरी ? इसी को सुशासन कहते हैं क्या ??
एटम बम हो या प्रधान-मंत्री की कुर्सी .... खिलौना नहीं है जनाब कि जब दिखा मचल गए। वो बात ठीक है कि आप, अपनी पार्टी की मजबूरी हैं, कोई और २०१४ तक दावेदार नहीं है, पर क्या बोलना और कब बोलना / बुलवाने का काम कोई अच्छी कंपनी को देना था। आख़िर एटम-बम वाले स्टेटमेंट कि जरुरत क्या थी? जनता को बरगालिये नहीं । जापान की तबाही देखने के बाद, मुझे नहीं लगता कि कोई भी देश भविष्य में एटम-बम का इस्तेमाल करे ! और वो देश भारत हो , ये तो मैं सोच भी नही सकता !!
सोमवार, 4 मई 2009
बुधवार, 22 अप्रैल 2009
ऐसे कैसे लौह पुरूष ?
आप लोगों ने कुछ लिखा नही ! खैर, बात चल रही थी राम की और मामला कोर्ट में है इसलिए कुछ बोलना ठीक नही होगा । मेरी आडवानी जी से गुजारिश सिर्फ़ इतनी है की वे पार्टी की ओर से पिछले १८ सालों में "राम के लिए क्या किया" पर एक श्वेत पत्र तो जारी करवा ही सकते हैं ।
विरोध में रहते हुए भी कई काम किए जा सकते हैं । लोग तो यही कहेंगे कि विरोध में रह के कर करवाओ फिर वोट मँगाने आओ । पॉलिटिक्स एक सर्विस है और जनता एक कस्टमर , और कस्टमर अब समझदार हो गया है । रसीद भी मांग रहा है !
मेरी समझ में यह नही आ रहा कि मामला अगर कोर्ट में है और आगे भी रहेगा तो क्या आप यही राग अगले ५० सालों तक आलापते रहेंगे ? आपके चलते राजनीति में जो गिरावट आई है, वह जग-जाहिर है - न आप किसी को 'विदेशी' या 'कमजोर' कहते और न ही कोई आप पर खडाऊं चलाता या आपको रिफ्यूजी कहता । ये तो जैसी करनी वैसी भरनी वाली बात हो गई !
माननीय महोदय आप विदेशों में जमा काले धन कि बात आज ही क्यों कर रहे हैं जब चुनाव सर पर है ? अगर आपने ५ साल पहले इसकी शुरुवात की होती तो शायद अब तक काफी पैसा वापस भी आ चुका होता ! ऐसे कैसे लौह पुरूष ? ऐसे कैसे पी ऍम इन वेटिंग ?
विरोध में रहते हुए भी कई काम किए जा सकते हैं । लोग तो यही कहेंगे कि विरोध में रह के कर करवाओ फिर वोट मँगाने आओ । पॉलिटिक्स एक सर्विस है और जनता एक कस्टमर , और कस्टमर अब समझदार हो गया है । रसीद भी मांग रहा है !
मेरी समझ में यह नही आ रहा कि मामला अगर कोर्ट में है और आगे भी रहेगा तो क्या आप यही राग अगले ५० सालों तक आलापते रहेंगे ? आपके चलते राजनीति में जो गिरावट आई है, वह जग-जाहिर है - न आप किसी को 'विदेशी' या 'कमजोर' कहते और न ही कोई आप पर खडाऊं चलाता या आपको रिफ्यूजी कहता । ये तो जैसी करनी वैसी भरनी वाली बात हो गई !
माननीय महोदय आप विदेशों में जमा काले धन कि बात आज ही क्यों कर रहे हैं जब चुनाव सर पर है ? अगर आपने ५ साल पहले इसकी शुरुवात की होती तो शायद अब तक काफी पैसा वापस भी आ चुका होता ! ऐसे कैसे लौह पुरूष ? ऐसे कैसे पी ऍम इन वेटिंग ?
शुक्रवार, 17 अप्रैल 2009
तौबा तेरा जलवा
आडवानी जी भोपाल आये थे और सेकुलरिस्म की नई परिभाषा दे गए । सुनकर कर वो गाना याद आ रहा है :
तौबा तेरा जलवा (प्रधानमंत्री इन वेटिंग)
तौबा तेरा प्यार (राम के प्रति, जो चुनावों के समय ही रास आता है)
तेरा राजनितिक (और धार्मिक भी) भ्रष्टाचार .
आप क्या सोचते हैं लिखिए :-
तौबा तेरा जलवा (प्रधानमंत्री इन वेटिंग)
तौबा तेरा प्यार (राम के प्रति, जो चुनावों के समय ही रास आता है)
तेरा राजनितिक (और धार्मिक भी) भ्रष्टाचार .
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