बुधवार, 22 अप्रैल 2009

ऐसे कैसे लौह पुरूष ?

आप लोगों ने कुछ लिखा नही ! खैर, बात चल रही थी राम की और मामला कोर्ट में है इसलिए कुछ बोलना ठीक नही होगा । मेरी आडवानी जी से गुजारिश सिर्फ़ इतनी है की वे पार्टी की ओर से पिछले १८ सालों में "राम के लिए क्या किया" पर एक श्वेत पत्र तो जारी करवा ही सकते हैं ।

विरोध में रहते हुए भी कई काम किए जा सकते हैं । लोग तो यही कहेंगे कि विरोध में रह के कर करवाओ फिर वोट मँगाने आओ । पॉलिटिक्स एक सर्विस है और जनता एक कस्टमर , और कस्टमर अब समझदार हो गया है । रसीद भी मांग रहा है !

मेरी समझ में यह नही आ रहा कि मामला अगर कोर्ट में है और आगे भी रहेगा तो क्या आप यही राग अगले ५० सालों तक आलापते रहेंगे ? आपके चलते राजनीति में जो गिरावट आई है, वह जग-जाहिर है - न आप किसी को 'विदेशी' या 'कमजोर' कहते और न ही कोई आप पर खडाऊं चलाता या आपको रिफ्यूजी कहता । ये तो जैसी करनी वैसी भरनी वाली बात हो गई !

माननीय महोदय आप विदेशों में जमा काले धन कि बात आज ही क्यों कर रहे हैं जब चुनाव सर पर है ? अगर आपने ५ साल पहले इसकी शुरुवात की होती तो शायद अब तक काफी पैसा वापस भी आ चुका होता ! ऐसे कैसे लौह पुरूष ? ऐसे कैसे पी ऍम इन वेटिंग ?

1 टिप्पणी:

  1. ऐसे नेता सिर्फ़ पी एम् इन वोटिंग ही रहे तो अच्छा है , इनका लोहा इनके पास ही रहे


    धन्यवाद ,
    मयूर

    अपनी अपनी डगर

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Thank you for participating in the discussion and giving your valued ideas.